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“त्वचा की कोशिकाओं से बने अंडाणु — मानव प्रजनन में विज्ञान लिख रहा नया अध्याय (प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट)”

विज्ञान जगत में ऐतिहासिक उपलब्धि, लेकिन अभी प्रयोगात्मक चरण में; विशेषज्ञों ने बताया—"नैतिक मानकों और सुरक्षा की विस्तृत समीक्षा आवश्यक"

पोर्टलैंड (अमेरिका), अक्टूबर 2025 | मानव प्रजनन से जुड़ी एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पहली बार एक वयस्क व्यक्ति की त्वचा की कोशिकाओं से प्रयोगशाला में अंडाणु (Oocytes) तैयार किए हैं, जिन्हें सफलतापूर्वक निषेचित कर प्रारंभिक मानव भ्रूण (Embryo) बनने तक विकसित किया गया है।

यह प्रयोग Oregon Health & Science University (OHSU) के वैज्ञानिकों ने किया और प्रतिष्ठित पत्रिका Nature Communications में प्रकाशित हुआ है। इसे “मानव प्रजनन विज्ञान का भविष्य बदलने वाला कदम” बताया जा रहा है।

🔬 कैसे किया गया यह शोध

शोधकर्ताओं ने त्वचा की कोशिकाओं से प्राप्त नाभिक को एक दाता अंडाणु (donor egg) में प्रत्यारोपित किया और विशेष जैव-रासायनिक विधियों से उसे अंडाणु की तरह विकसित किया।

इसके बाद इन कृत्रिम अंडाणुओं को निषेचित किया गया, जिससे कुछ भ्रूण (blastocysts) छह दिनों तक प्रयोगशाला में विकसित हो सके। हालांकि, कई भ्रूणों में क्रोमोसोम असंतुलन पाया गया, जिसके कारण फिलहाल इसे केवल “प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट” (प्रारंभिक सफल प्रयोग) माना गया है।

शोध की मुख्य उपलब्धियां-

यह शोध, जिसे ‘माइटोमियोसिस’ (mitomeiosis) नाम दिया गया है, सॉमेटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) तकनीक पर आधारित है — वही विधि जो 1997 में भेड़ ‘डॉली’ की क्लोनिंग में इस्तेमाल हुई थी। शोधकर्ताओं ने त्वचा कोशिकाओं के नाभिक को एक डोनर अंडाणु (जिसका अपना नाभिक हटा दिया गया हो) में प्रत्यारोपित किया। इसके बाद, डोनर अंडाणु के साइटोप्लाज्म ने त्वचा कोशिका के नाभिक को प्रेरित किया, जिससे कोशिका ने अपने 46 गुणसूत्रों में से आधे (23) को त्याग दिया — ठीक वैसे ही जैसे प्राकृतिक मियोसिस प्रक्रिया में होता है। अंत में, इन कृत्रिम अंडाणुओं को शुक्राणु से निषेचित (फर्टिलाइज) किया गया, जिससे प्रारंभिक अवस्था के भ्रूण बने।

🌱 मानवता के लिए संभावनाएँ-

इस उपलब्धि से भविष्य में — निःसंतान दंपतियों के लिए नई उम्मीदें, समान-लैंगिक जोड़ों के लिए जैविक बच्चे की संभावना और मानव भ्रूण विकास को गहराई से समझने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

⚠️ नैतिक और वैज्ञानिक चुनौतियाँ-

विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह शोध अभी प्रारंभिक स्तर पर है और इसे मानव प्रजनन में इस्तेमाल करने से पहले कई नैतिक, कानूनी और वैज्ञानिक समीक्षा जरूरी हैं।

भ्रूणों में पाए गए असामान्य क्रोमोसोम पैटर्न फिलहाल इस तकनीक को प्रयोगशाला तक सीमित रखते हैं।

🧬 शोधकर्ताओं का मानना—

” प्रमुख शोधकर्ता टीम ने कहा—“हमारा उद्देश्य यह दिखाना था कि त्वचा कोशिकाओं से अंडाणु बनाना जैविक रूप से संभव है। यह भविष्य की संभावनाओं का द्वार खोलता है, लेकिन अभी इसे इंसानी उपयोग के लिए तैयार नहीं कहा जा सकता।”

📘 संक्षेप में-

त्वचा कोशिकाओं से अंडाणु निर्माण की यह खोज न केवल प्रजनन विज्ञान को नया आयाम देगी, बल्कि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी क्रांति ला सकती है। जैसे-जैसे शोध आगे बढ़ेगा, बांझपन जैसी वैश्विक समस्या का समाधान करीब आता जाएगा। क्या यह तकनीक भविष्य में हर इच्छुक माता-पिता के सपनों को साकार कर पाएगी? आने वाला समय ही बताएगा।

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